जब रिंकी ने बंटी को कहा ‘हां’

बंटी (मन में बुदबुदाते हुए): आज घर के सामने पेड़ पर रस्सी बांध देता हूं, कपड़े सुखाने के लिए।

पड़ोस में रहनेवाली रिंकी: अरे-अरे क्‍या कर रहे हो तुम, ऐसा कदम मत उठाना। मेरी तरफ से हां है।

प्रखर, रोहतक

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