चूहे की कविता

चूहे का सेहरा सुहाना
लगता है …
चुहिया का तो दिल दिवाना
लगता है।
पल भर में ऐसे कुतरते हैं
कपड़े
अब तो हर कपड़ा पुराना
लगता है…
सात रंगो से बना कपडों का
ये संगम
काट देते हैं ये कपड़े बनकर के
सिंघम
हर कपड़ा सिंघम से बचाना
पड़ता है।
कपडो़ का अब तो तकिया बनाना पड़ता है।

श्रुति तिवारी, हुगली

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