Rajan ko apni chalaki ulti par gayi

फ्रंटियर मेल दिल्ली रेलवे स्टेशन से रात को अमृतसर की तरफ रवाना होने वाली थी राजन चालू टिकट लेकर जरनल डिब्बे मे चढ़ गया डिब्बा खचाखच भरा हुआ था ……
उसे बैठने तक की जगह नहीं मिली तो उसने एक तरकीब लगाई और “सांप, सांप, सांप,” चिल्लाना शुरू कर दिया…
लोग डर के मारे सामान सहित उतर कर दूसरे डिब्बों में चले गए…..
रात के १० बजने वाले थे और राजन काफी थका हुआ था वो ठाठ से ऊपर वाली सीट पर बिस्तर लगा कर लेट गया और जल्दी गहरी नींद मे सो गया …..
सवेरा हुआ,”चाय, चाय” की आवाज पर वे उठा चाय ली और चाय वाले से पूछा कि कौन सा स्टेशन आया है ?
तो चाय वाले ने बताया, “ दिल्ली ” है…..
फिर राजन ने हैरानी से  , दिल्ली  से तो रात को चले थे ?”
चाय वाला बोला , “इस डिब्बे में सांप निकल आया था ..इसलिए इस डिब्बे को यहीं काट दिया गया था …..

 

 

Frontier Mail was about to leave from Delhi railway station towards Amritsar at night. Rajan, carrying the current ticket, climbed into the journal compartments and the compartments was full ……
 When he could not find a place to sit, he put an idea and started shouting “Snake, snake, snake,”…
People went out in other compartments with the goods out of fear… ..
It was 10 o’clock in the night and Rajan was very tired. He lay down on the upper birth  and went to sleep fast… ..
In the morning, at the sound of “chai, chai”, he woke up and asked the chaiwala what station came.
So the chaiwala  said, “Delhi” is… ..
Rajan asked surprised, train left Delhi last night?
Chai Wala said, “A snake had come out in this compartments … so this compartments  was cut here… ..

 

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